बहुत तकलीफ होती है जब आप योग्य हों पर आपकी योग्यता कोई न पहचाने
10 Jan, 2022
मिर्जापुर वेब सीरीज से
"बहुत तकलीफ होती है जब आप योग्य हों पर आपकी योग्यता कोई न पहचाने" ये एक बेहद सफल वेब सीरीज मिर्जापुर का डायलॉग है, पर यह एक कड़वी सच्चाई को समाज के बीच रखती है ऐसा लगता है । "योग्यता " शब्द का शब्दार्थ कुछ इस प्रकार है - ज्ञान, अनुभव, शिक्षा आदि की दृष्टि से वह विशेषता या गुण जिसके आधार पर कोई किसी कार्य या पद के लिए उपयुक्त समझा जाता है । इतिहास को झाँककर देखें तो एकलव्य अर्जुन से ज्यादा योग्य था परन्तु गुरु द्रोणाचार्य ने एक्लव्य की कुशलता को देखकर काफी प्रभावित हो गए थे पर छल से गुरुदक्षिणा के रूप में अंगूठा मांग लिये ये अपने आप में एक वीर योद्धा के लिए मरण जैसा था फिर भी एक्लव्य ने गुरु-शिष्य की परम्परा को एक आयाम स्थापित किया अपने अंगूठे को गुरुदक्षिणा में दान दे दिया । क्या ये उचित था ?? या छल था ?? सोचिये समझिये चिंतन करिए ऐसा सिर्फ इतिहास में होता आया है या फिर आज भी ऐसा हो रहा है वर्तमान शिक्षा पद्धति में भारत जैसे देश में शिक्षा और नौकरी में योग्यता के अनुरूप उनका चयन हो पाता है क्या ??उत्तर खोजने की कोशिश कीजियेगा तो पता चलेगा कि कितने ही द्रोणाचार्य कितने एकलव्य की मानसिक रूप से हत्या की होगी ये अपने आप में एक बहुत बड़ा सच है। इस लिंक के खबर को पढ़िए https://www.livehindustan.com/national/story-122-iit-and-iim-students-commits-suicide-in-last-seven-years-says-centre-in-parliament-5377219.html
Write a comment ...